जयपुर। इस दौड़ती-भागती जिंदगी में इंसान कब कौनसी बीमारी से घिर जाए, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। बदलते दौर में एक के बाद एक ऐसी बीमारियां सामने आ रही हैं जो मानव जाति को काफी डरा रही हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है कैंसर। विश्व भर में हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1933 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी। इसके पीछे ये उद्देश्य रहता है कि लोगों को इस बीमारी और इससे बचने के तरीकों को लेकर जागरूक किया जा सके। निर्वाण विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्व कैंसर दिवस मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ अशोक कुमार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में एडवाइजर डॉ आदित्य नाग, डॉ एके चौधरी, प्रोफेसर मधु कुमार, संदीप कुमार, अनूप, सुनील कुमार, अशोक कुमार के अलावा डॉ सोहन, लोकेश जोशी, ऊषा, आँचल एवं विभिन्न विभागों के प्राध्यापक तथा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

कुलपति ने बताया कि मात्र जागरूकता से करीब 40% लोगों को इस बीमारी से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि कैंसर छूने से भी फैलता है, जिससे वे मरीज से सही व्यवहार नहीं करते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बल्कि वर्ष 2019 से 2021 तक के लिए इसकी थीम है “मैं हूं और मैं रहूंगा।” विश्वविद्यालय के एडवाइजर डॉ आदित्य नाग ने बताया कि वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 76 लाख लोग कैंसर से दम तोड़ते हैं जिनमें से 40 लाख लोग समय से पहले (30-69 वर्ष आयु वर्ग) मर जाते हैं। इसलिए समय की मांग है कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ कैंसर से निपटने की व्यावहारिक रणनीति विकसित करना है। वर्ष 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों के बढ़कर प्रति वर्ष 60 लाख होने का अनुमान है। यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल किया जाए तो हर साल 15 लाख जीवन बचाए जा सकते हैं। निर्वाण विश्वविद्यालय शीघ्र ही अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान केंद्र स्थापित करेगा।

प्रो एके चौधरी, डॉ सोहन ने भी जागरूकता अभियान के बारे में एवं कैंसर के लक्षण के बारे में बताया। सभी छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष की थीम पर शपथ ली और 33 व्यक्तियों को निकट के गांवों एवं स्थानों पर जाकर जागरूक करने का प्रण लिया।

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