बड़ी-बड़ी बातों के इस युग में हर कोई बिल गेट्स या अंबानी बनना चाहता है। हर पल बड़ा सोचना और बड़े लोगों की तरह जीने की सोच में कुछ गलत नहीं है, लेकिन छोटी शुरुआत करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। बड़ा शुरू करने के इंतजार में समय निकल जाता है और आत्मविश्वास खत्म हो जाता है। फिर जो हाथ में आता है, उसी को स्वीकार कर उसे जीवन मान लेते हैं।
बेस्टसेलर बुक ‘हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपुल’ के प्रसिद्ध लेखक डेल कार्नेगी की शुरुआत छोटे से एक व्याख्यान से हुई थी। उन्होंने देखा कि कुछ लोग अधिक जानने के लिए इच्छुक थे। आखिरकार छोटी-सी बात एक कोर्स बन गई और फिर कार्नेगी ने पुस्तक को आकार देना शुरू कर दिया। आप ज्यादातर सफल व्यवसायों को देखें तो पाएंगे कि एपल, डेल, अमेजन सभी की शुरुआत छोटे रूप में हुई थी। छोटी शुरुआत करने की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि कम से कम रिस्क में, कम समय में, कम चुनौती में काम तो शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे आत्मविश्वास आने लगता है और हम बड़े निर्णय लेने लग जाते हैं।
छोटी शुरुआत कर धीरे-धीरे बड़ी आदत में बदला जा सकता है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो क्या 3 घंटे रोज दौडऩे से शुरुआत करेंगे या पहले सप्ताह दिन में केवल एक घंटे से शुरू करेंगे? पहला विकल्प जोश-जोश में अधिक प्रभावी लगता है, लेकिन जैसे ही जोश ठंडा होगा, यह असफल हो जाएगा। यदि आप कोई आदत बनाना चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि छोटी शुरुआत करें। छोटी शुरुआत खुद पर अत्यधिक दबाव नहीं आने देती।
सोचिए अगर आप बिना किसी व्यावसायिक पृष्ठभूमि के अचानक व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लेते हैं, वहां तक कोई समस्या नहीं है। समस्या तब है, जब आप पहले ही साल में कुछ करोड़ कमाने का लक्ष्य बना लेते हैं। यही कारण है कि बहुत से लोग अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में विफल हो जाते हैं, क्योंकि वे व्यावहारिकता से दूर बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं और बाद में अवसाद के शिकार हो जाते हैं।
छोटा शुरू करने में जोखिम कम है और सुधार का मौका होता है। ‘न्यूनतम स्वीकार्य उत्पाद’ या एमवीपी का प्रसिद्ध सिद्धांत कहता है कि आप शुरुआती ग्राहकों को संतुष्ट करने और अपने उत्पाद के बारे में ग्राहकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए सिर्फ एक उत्पाद के साथ बाजार में आइए। इस सिद्धांत के तहत आप कम लागत में उत्पाद विकसित करते हैं और उसे बाजार में जल्दी से परखते हैं। यदि उत्पाद विफल हो जाता है, तो कम से कम आपके लाखों या करोड़ों बर्बाद नहीं होते। यानी कम जोखिम में भी आपको टेस्ट करने का मौका मिल गया।
बड़ा सोचिए, भविष्य की योजना दिमाग में रखिए मगर इंतजार मत कीजिए। छोटी शुरुआत कर लीजिए। जो है उससे शुरू करें। जहां हैं, वहां से शुरू करें। सही मौके के इंतजार ने करोड़ों के सपनों को खत्म कर दिया।

– डॉ. उज्जवल पाटनी, बिजनेस कोच, मोटिवेशनल ऑथर

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