रूस से Roots Post के लिए श्वेता सिंह

घर, गांव, शहर और अपना देश छोडऩे के बाद एक प्रवासी के जीवन की शुरुआत एक नए जन्म के रूप में होती है। प्रवासी जीवन का अपना घूर्णन है। नए परिवेश में स्वयं को ढालने की पुकार पहले दिन से ही जीवन में, अंतरंग बदलाव की पहल आरम्भ हो जाती है। एक तकरार जीवन में शुरू हो जाती है। यही तकरार जीवन शिल्प गढऩे लगती है। इसी गढऩ से दृष्टि का विकास होता है। समझ का क्षितिज व्यापक होता है। पुराना टूटता और नया अंकुरित होता है। प्रत्येक प्रवासी की यही कहानी है। ‘प्रवास : मेरा नया जन्म’ आयोजन में डॉ. रामा तक्षक, अध्यक्ष, साझा संसार नीदरलैंड्स के इस वक्तव्य ने सभी प्रवासियों के दिल की भावना सामने रख दी।
साझा संसार की पहल पर जूम पर हुए इस आयोजन की अध्यक्षता लंदन में रहने वाले तेजेंद्र शर्मा ने की। तेजेंद्र शर्मा लब्ध प्रतिष्ठित भारतीय प्रवासी कथाकार हैं। इन्हें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। अध्यक्षीय वक्तव्य में तेजेंद्र शर्मा ने अपने प्रवासी जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्हें प्रवासी जीवन विरासत में मिला। माता-पिता देश के बंटवारे के समय भारत आए थे। उन्होंने कहा कि मैंने छठी से आठवीं कक्षा में ही हिन्दी पढ़ी। लेकिन मेरी पत्नी ने मुझे हिन्दी सिखाई और आज एक सफल लेखक के पीछे मेरी पत्नी का हाथ है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में लोग दिव्यांग व्यक्ति को दया दृष्टि से नहीं, बल्कि इंसान की दृष्टि से देखते हैं। यहां के लोग सीधा वार्तालाप करना पसंद करते हैं। जो शब्दों में कहते हैं वही करते भी हैं। उनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है। अमेरिका से विनीता तिवारी ने ‘पूरब और पश्चिम’ संस्मरण पढ़ा। नई परिस्थितियों में प्रवासी की मन:स्थिति का सुन्दर रेखाचित्र खींचा। रूस से श्वेता सिंह उमा ने कविता ‘जीना कब शुरू करोगे’ का पाठ किया। मोनी बिजय कोइराला ने दोहा कतर से ‘संघर्ष, साहस और सफलता’ कविता पढ़ी। नीदरलैंड्स द हेग से विश्वास दुबे ने कहा कि विश्व में शांति मानवता का पहला अधिकार है और द हेग शहर शांति का शहर है। उन्होंने स्वरचित गीत ‘मेरे देश से दूर ये देश है अपना…’ भी प्रस्तुत किया। राजेन्द्र शर्मा भी आयोजन में मौजूद रहे।

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