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रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया की 47वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस आयोजित

जयपुर। रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) की 47वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित हुई। कॉन्फ्रेंस का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. सी. मुनिचूडप्पा, डायबेटोलॉजिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, बैंगलोर द्वारा किया गया। आरएसएसडीआई के अध्यक्ष डॉ. राजीव चावला एवं डॉ. सीएल नवल ने कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों का स्वागत किया। आयोजन अध्यक्ष डॉ. केके पारीक और आयोजन सचिव डॉ. प्रकाश केसवानी ने मेहमानों को संबोधित किया। सचिव डॉ. बीएम मक्कड़ ने एसोसिएशन के बारे में जानकारी दी। आरएसएसडीआई के आगामी अध्यक्ष डॉ. बंशी साबू ने वर्ष के लिए आगामी योजनाओं के बारे में बताया। सम्मेलन में स्वर्गीय प्रो बीएन श्रीवास्तव और स्वर्गीय सरदुलारी श्रीवास्तव पुरस्कार से डॉ. संजय कुमार को सम्मानित किया गया। नोवार्टिस यंग रिसर्चर अवार्ड डॉ रिद्धिदास गुप्ता को और डॉ सिद्धार्थ दास को प्रतिष्ठित सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
दिल्ली के डायबिटीज केयर विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि इस तरह की कॉन्फ्रेंस से फ्रेशर्स को एक तरह का मोटिवेशन मिलता है कि उन्हें किस दिशा में स्टडी व रिसर्च करनी चाहिए। वर्तमान में टेक्नोलॉजी हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है और आने वाले समय में यह पेशेंट के डायबिटीज मैनेजमेंट में बड़ा रोल प्ले करेगी। मुंबई से विशेषज्ञ डॉ. मनोहर चावला ने कहा कि डायबिटीज में कॉन्सेप्ट चेंज हो रहे हैं। दवाइयों से केवल शुगर ही कम न हो बल्कि हार्ट व किडनी के बचाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मरीज शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल में रखें जिससे आगे जाकर डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशन नहीं आएं। आर्टेमिस अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. धीरज कपूर ने कहा कि डायबिटीज से कभी मृत्यु नहीं होती बल्कि हार्ट अटैक या किडनी फेलियर से दिक्कत आती है। बढ़ी हुई शुगर इनके जरिए तंग करती है।
कॉफ्रेंस में डॉ. राजीव चावला, डॉ. बीएम मक्कड़, डॉ. बंसी साबू सहित कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डायबिटीज विशेषज्ञ भी शामिल रहे। इनमें डॉ. एनटोनियो सैरिलियो, डॉ. जैको, डॉ. ताडेज, डॉ. कन्नूमलाई, डॉ. जिबिन ची रहे। अमेरिका, इंग्लैण्ड, आस्ट्रिलिया, इटली, फ्रांस, सिंगापुर आदि देशों से ये विशेषज्ञ शामिल हुए।

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