– मनीष कुमार गुप्ता ( अमेरिका ) –

जब भी नदी उमड़ती देखता हूँ
या बर्फ़ लदे पर्वत
घुमड़ते झरने
लहराते दरख़्त

झट फोन निकाल कर
लेता हूँ फ़ोटो
या वक़्त हो तो
बनाता हूँ वीडियो

चलते चलते जब पैरों के पास से
गुज़रता है चीटियों का झुंड
वीरबहूटी का हुजूम
रेंगता घोंघा
सरकता केंचुआ

मैक्रो मोड में पैनी
तस्वीर खींचता हूँ
एक नहीं
अलग-अलग एंगल से

जब विहंगम दृश्य दिखाई देता है
किसी चोटी से
या डूबते सूरज की लालिमा
या झील पर शाम के वक़्त
झिलमिलाती रोशनियाँ

कोशिश करता हूँ
सबसे अच्छी तस्वीर खींच सकूँ
4k रेसोल्यूशन की, या फिर और ज़्यादा

पतझड़ में हवा में उड़ते पत्ते
एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर
छलांग लगाते पंछी
या फूलों पर मँडराते
भँवरे, मधुमक्खियों को

स्लो-मोशन के वीडियो में
क़ैद करना रास आता है

नेशनल पार्क में रात का
तारों भरा आसमान
पूरणमासी का चाँद
5x ज़ूम कर ली गयी
बाल्ड ईगल की तस्वीर को

फ़ोटोशॉप में इस तरीक़े से
एडिट करता हूँ
कि जीवंतता के बिलकुल
करीब लगे

भरता जा रहा हूँ
मेमोरी कार्ड, हार्ड डिस्कें
क्लाउड पर बैक-अप
यूट्यूब, फेसबुक या जहां भी
हो सके सबको भेजता जा
रहा हूँ, चस्पा किए जा रहा हूँ

जिस तरह मैंने पुराने चित्रों और वीडियो से
देखे
सल्तनतों के काफ़िले
नवाबों के जवाहरात
विश्व युद्ध का कहर
हॉलोकॉस्ट के आघात

गाँधी की यात्रा
मार्टिन लूथर का भाषण
परमाणु विस्फोट का मशरूम बादल
तेल के जलते कुओं के क्षण

ठीक उसी तरह
शायद इन सब चित्रों को
देख सके आने वाली सदियाँ
और जान सके
कैसी थी हमारी दुनिया…

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