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जेकेके में प्रतिभागी सीख रहे हैं सेरीग्राफी स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीक

जयपुर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के ग्राफिक स्टूडियो में 27 अक्टूबर तक पांच दिवसीय ‘सेरीग्राफी स्क्रीन प्रिंटिंग वर्कशॉप’  आयोजित की जा रही है। वर्कशॉप फैसिलिटेटर, कविता नायर द्वारा 10 प्रतिभागियों को प्रिंटमेकिंग की विभिन्न तकनीकें सिखाई जा रही हैं। सेरीग्राफी की उत्पत्ति की जानकारी देते हुए कविता ने बताया कि ‘सेरी’ शब्द  लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ ‘सिल्क’ होता है और ‘ग्राफो’ ग्रीक शब्द है, जिसका अर्थ है ‘लिखना’। इस तकनीक के शुरूआती दिनों में प्रिंटिंग के लिए ‘सिल्क’ का उपयोग किया जाता था, हालांकि, अब नायलॉन के कपड़े ने इसका स्थान ले लिया है। इस प्रक्रिया में नीचे रखे कागज पर फाइन स्क्रीन के जरिए स्याही का दबाव बनाया जाता है। विभिन्न तकनीक के अनुसार प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है। डायरेक्ट प्रोसेस में स्क्रीन पर ड्राइंग बनाई जाती है, जबकि आल्टरनेटिव प्रोसेस में स्टैंसिल्स का उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार फोटोग्राफिक सेरीग्राफी में स्क्रीन पर फोटोसेंसेटिव इमल्शन की ब्लैक थिक इंक की कोटिंग का उपयोग किया जाता है। प्रिंटिंग करने के लिए इस स्क्रीन को अंधेरे कमरे में यूवी किरणों के संपर्क में लाया जाता है। कविता ने आगे बताया कि कोर्स के पांच दिनों में प्रतिभागियों को ये सभी तकनीकें सिखाई जाएगी और उन्हें सेरीग्राफी के इतिहास एवं उत्पत्ति का सैद्धांतिक ज्ञान भी प्राप्त होगा। कार्यशाला में नाॅन-टाॅक्सिक एक्रिलिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है।

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