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अपनी किडनी दान कर चुके बुजुर्ग निकले अंगदान जागरूकता के 100 दिन के सफर पर

पुणे। लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने के लिए महाराष्ट्र के सांगली के रहने वाले 67 वर्षीय किसान प्रमोद महाजन 100 दिन के सफर पर निकले हैं। प्रमोद खुद अंगदानकर्ता हैं और उन्होंने अपनी एक किडनी दान कर रखी है। बीते रविवार को उन्होंने पुणे से अपने इस सफर की शुरुआत की। उनकी योजना देशभर में 10,000 किलोमीटर का सफर तय करना है। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ सही रहा तो वे 15,000 किलोमीटर का सफर तय कर लेंगे। पुणे में केईएम अस्पताल में रीजनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन द्वारा प्रमोद का स्वागत किया गया। प्रमोद ने इस मौके पर बोलते हुए कहा, ‘मैंने जिस व्यक्ति को अपनी किडनी दान की थी, अब उसकी शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं। उसकी जिंदगी में 16 और साल जुड़ गए हैं। मुझे इससे ज्यादा खुशी नहीं मिल सकती कि मैंने किसी को जिंदगी दी है।’ यदि ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान होने लग जाए, तो प्रतिवर्ष कई लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

रीजनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन प्रमुख डॉ. अस्ट्रिड लोबो गाजीवाला ने बताया कि बीते साल 114 लोगों ने अंगदान किया था। लेकिन यह संख्या काफी कम है इसलिए प्रमोद लोगों को जागरूक करने निकले हैं। प्रमोद ने कहा, ‘बॉम्बे हॉस्पिटल में अपने ऑपरेशन के बाद मुझे कोई मुश्किल महसूस नहीं हुई। अब मैं अपने इस अभियान के जरिए देशहित में कुछ योगदान करना चाहता हूं।’ प्रमोद ने इस यात्रा का नाम ‘भारत ऑर्गन यात्रा’ रखा है। इस सफर का खर्च ‘रीबर्थ’ एनजीओ द्वारा उठाया जा रहा है। यह एनजीओ लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करता है। रिबर्थ के फाउंडर गणेश बकाले ने कहा, ‘वैसे तो प्रमोद पेशे से किसान हैं, लेकिन अंगदान के प्रति उनके भीतर अलग ही जुनून है। उन्होंने काफी साल पहले खुद की किडनी दान कर दी थी। जिस व्यक्ति को उन्होंने किडनी दी थी वह सेना का जवान था।’ अंगदान को लेकर आमजन में अभी भ्रांतियां हैं। इन्हीं में से एक यह भी है कि अंगदान के लिए शरीर के साथ चीरफाड़ करने से उसका स्वरूप बिगड़ जाता है। जबकि ऐसा नहीं है।

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