– प्रियंका सिंह (रोटरडम द नीदरलैंड्स) –

ज़िन्दगी, बहुत ख़ास है तू !

कभी भारी, तो कभी हल्का, कोई लिबास है तू !!

तेरा अंदाज़-ए-बयां भी कुछ निराला सा !

कभी खुशबूदार-गुलदस्ता, तो कभी ग़म का प्याला सा !!

मनचली है तू और सिक्कों सी पलट जाती है !

कभी होठों से बरसती, तो कभी आँखों से छलक जाती है !!

तेरे रूप हज़ारों और नित नए रंग चुनती तू !

उम्मीद की सीढ़ी पे चढ़ नए सपने बुनती तू !!

पर ज़ज़्बातों के समंदर से तू हर बार उलझ जाती है !

फिर दिल की पतवार थाम, चुपके से सुलझ जाती है !!

तू खूबसूरत भी है और मज़ेदार भी !

बड़ी विचित्र सी है तू और गुलज़ार भी !!

मुश्किल सी दिखती है, मगर आसान है तू !

रहती है रौब में, मगर मौत का मेहमान है तू !!

ज़िन्दगी, बहुत ख़ास है तू !

कभी भारी, तो कभी हल्का, कोई लिबास है तू !!