रेसिप्रॉसिटी प्रिंसिपल, सोशल साइकोलॉजी के सबसे बेसिक प्रिंसिपल्स में से एक है। इसके अनुसार सोशल सिचुएशंस में आप किसी इंसान के पॉजिटिव एक्शन का अहसान पॉजिटिव एक्शन से चुकाते हैं। अगर किसी ने आप पर कोई फेवर किया तो समय आने पर आप भी उसके साथ कुछ अच्छा करने की कोशिश करेंगे। रॉबर्ट चैल्डिनी की पुस्तक, इंफ्लुएंस : साइंस एंड प्रैक्टिस के अनुसार आपको कुछ पाने के लिए कुछ देना पड़ता है। इस प्रिंसिपल का इस्तेमाल करने से पहले कंपनी ने अपने कस्टमर बेस से पूछा कि नेटफ्लिक्स के लिए साइन अप करने से पहले वे क्या जानना पसंद करेंगे। जब 46 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे उपलब्ध सभी मूवीज व टीवी शोज के नाम जानना चाहेंगे तो कंपनी ने कस्टमर्स को होम पेज पर कंटेट दिखाना शुरू किया। हालांकि कस्टमर्स को बहुत अधिक कंटेंट दिखाना उनके लिए ध्यान बांटने वाला साबित हुआ। इस पर कस्टमर्स ने ब्राउजिंग तो की, लेकिन साइन अप नहीं। इसलिए नेटफ्लिक्स ने रेसिप्रॉसिटी प्रिंसिपल का इस्तेमाल करते हुए अपने एक्सपेरिमेंट को फिर से डिजाइन किया। इस बार उन्होंने एक इमेज के जरिये पूरे कैटेलॉग का हिंट दिया, लेकिन अपना पूरा कैटेलॉग नहीं दिखाया। इसके बाद तो कंपनी को बहुत से साइन अप्स मिलने लगे। इस तरह लोगों को टोटल व्यू की बजाय स्नीक पीक देने से कस्टमर्स फ्री ट्रायल के लिए साइन अप करने की ओर आकर्षित हुए।

आइडलनेस एवर्जन से भी लिया फायदा
साइकोलॉजी, हैप्पीनेस व कस्टमर एक्सपीरिएंस के फील्ड्स में की गई स्टडीज के अनुसार आइडलनेस एवर्जन नामक प्रिंसिपल यह कहता है कि लोग तब अधिक खुश रहते हैं जब वे व्यस्त हों, फिर चाहे उन्हें व्यस्त रहने के लिए मजबूर ही क्यों ना किया गया हो। इसके अनुसार लोग खाली बैठने से डरते हैं, ऐसे में लोगों को व्यस्त रखने के लिए इस तरह की इंफॉर्मेशन दी जाती है, जिससे वे खुद को एंगेज कर सकें जैसे एनिमेशन और विजुअल्स। नेटफ्लिक्स इसे मजेदार तरीके से लागू करती है। जब भी आप नेटफ्लिक्स पर किसी टाइटल को देखते हैं तो उसके ट्रेलर्स ऑटो-प्ले हो जाते हैं। हालांकि कई कस्टमर्स को यह फीचर फ्रस्ट्रेटिंग लगता है, लेकिन नेटफ्लिक्स को इससे होने वाले बेनिफिट्स संख्या में कई हैं।

कॉकटेल पार्टी इफैक्ट का भी उपयोग
कॉकटेल पार्टी इफैक्ट, बे्रन की अन्य सोर्सेज से आती आवाजों को नजरअंदाज कर किसी एक आवाज की ओर ध्यान लगाने की क्षमता की ओर इशारा करता है। वैसे ही जैसे एक शोरगुल भरी पार्टी के दौरान आप किसी व्यक्ति से आराम से बात कर पाते हैं। इसके अनुसार लोग उस इंफॉर्मेशन पर फोकस करना पसंद करते हैं जो उनके लिए रेलेवेंट होती है। हालांकि यह इफैक्ट यह भी साबित करता है कि अगर आप गहराई में जाएं तो रेलेवेंट कंटेंट आपको शानदार रिजल्ट्स भी दे सकता है। नेटफ्लिक्स खुद को कस्टमर-ऑब्सेस्ड कहती है और एक पर्सनलाइज्ड एक्पीरिएंस देने की पूरी कोशिश करती है। इसका उदाहरण है उसकी ‘बिकॉज यू वॉच्ड’ कैटेगिरी। इस कैटेगिरी में नेटफ्लिक्स कस्टमर्स को उनकी व्यूइंग एक्टिविटी के आधार पर शोज रिकमेंड करती है। पिछले कुछ वर्षों में कस्टमर्स ने नेटफ्लिक्स पर 80 प्रतिशत शोज इसलिए देखे, क्योंकि उन्हें वे नेटफ्लिक्स ने रिकमेंड किए थे। यानी उन्होंने खुद किसी खास कंटेंट को देखने की बजाय नेटफ्लिक्स पर भरोसा किया।

टेस्ट एंड लर्न से भी मदद
पिछले एक दशक में नेटफ्लिक्स की साइट में कई बदलाव देखने को मिले हैं। ये सभी चेंजेज और ऑप्टिमाइजेशंस कंपनी के टेस्ट एंड लर्न के प्रिंसिपल पर आधारित डिजाइन कल्चर के कारण संभव हो पाए। कंपनी के कई आइडियाज को ए/बी टेस्टिंग (एक ही चीज के दो वर्जन्स की तुलना) से गुजारा जाता है ताकि जान सके कि मेंबर एक्विजिशन व सैटिस्फैक्शन पर उनका क्या असर होता है। इस एक्सपेरिमेंट्स के रिजल्ट्स से कंपनी महत्वपूर्ण चीजों पर फोकस कर पाती है।