जयपुर। दीपावली के समय लक्ष्मीजी के स्वागत के लिये घर के बाहर पगलियां मांडना आर्ट बनाया जाता है। पगलियां का अर्थ है पद चिन्ह। राजस्थान में ऐसी पारम्परिक मान्यता है कि दीपावली के समय घर के बाहर फर्श पर मांडना बना होता है तो लक्ष्मीजी घर पर प्रवेश जरूर करती है। राजस्थान में मांडना शादी, विवाह, जन्म उत्सव, त्यौहार, आदि खुशी एवं शुभ अवसरों पर भी बनाया जाता है। यह कहना था जयपुर की युवा कलाकार शीला पुरोहित का। वे राजस्थान स्टूडियो द्वारा एमिटी यूनिवर्सिटी जयपुर के सहयोग से रूफटॉप ऐप पर विशेष रूप से आयोजित मांडना फोक आर्ट वर्कशॉप में संबोधित कर रही थी। उन्होंने इस दौरान मांडना से जुड़ी लघु कथा भी सुनाई।

पगलियां मांडना बनाने के लिये उन्होंने सर्वप्रथम एमडीएफ बोर्ड पर गेरू मिट्टी में फेविकोल एवं पानी मिला कर बेस तैयार किया और फिर इसे सुखा दिया। इसके बाद उन्होंने सफेद रंग से घर में प्रवेश करते हुए लक्ष्मीजी के पैर की आउटलाईन बनाई और लाईनों की सहायता से मांडना के डिजाइन का भराव किया। फिर उन्होंने मांडना के चारों ओर सूरज, चांद, सितारे बना कर डेकोरेट किया।

मणिपाल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के लिये आयोजित वर्कशॉप में सृष्टि जिंदल ने मार्बलिंग आर्ट बनाना सिखाया। इसके अतिरिक्त साक्षी पारख ने मुम्बई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों के लिये ‘बोटल डेकोर’ वर्कशॉप का संचालन किया। वर्कशॉप में को-क्रियेट करने वाले प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट दिये गये।

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