जयपुर। 33 साल के लंबे अनुभव के साथ डॉ. मुजाहिद सलीम ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में जो मरीज चलने-फिरने को भी मोहताज थे, उनका इलाज कर उन्हें फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या में लौटने योग्य बनाया। डॉ. मुजाहिद ने अपने करियर में 15000 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर मरीजों के जीवन को गति दी।

राजधानी में बढ़ाया मेडिकल टूरिज्म
जयपुर में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने में डॉ. मुजाहिद सलीम का काफी योगदान रहा है। 25 सालों तक दूसरे देशों में सेवाएं देने के बाद वहां के मरीज अपना इलाज कराने के लिए अभी भी लंबी दूरी तय कर यहां डॉ. मुजाहिद के पास आते हैं। डॉ. मुजाहिद ने बताया कि मेरे पास जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए अमेरिका, अफ्रीका, सऊदी अरब, फिजी आइलैंड, कनाडा, सिंगापुर, यमन, अफगानिस्तान, कांगो से काफी मरीज आते हैं। इससे जयपुर में मेडिकल टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलता है। डॉ. मुजाहिद सलीम को सम्पूर्ण दोनों घुटनों, दोनों कूल्हों का एक साथ प्रत्यारोपण, कोहनी, कंधा, आंशिक घुटने का प्रत्यारोपण करने में महारत हासिल है। वर्तमान में डॉ. मुजाहिद खंडाका हॉस्पिटल और अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।

इस मुकाम के लिए किया माता-पिता और गुरुओं का आभार
जीवन में किसी भी मुकाम पर पहुंचने में एक गुरु की भूमिका बहुत अहम होती है। डॉ. मुजाहिद ने बताया कि उनकी स्कूलिंग सेंट जेवियर्स स्कूल में हुई है और आज वह जो कुछ भी हैं, जिस मुकाम पर भी हैं, सिर्फ अपने माता-पिता (जो शिक्षक थे) और गुरुओं के मार्गदर्शन की वजह से हैं। डॉ. मुजाहिद ने बताया कि प्रोफेसर जे.सी. शर्मा और प्रोफेसर विनोद काटजू के नेतृत्व में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया और उनसे बहुत कुछ सीखा। सर्जरी की बारीकियां उन्होंने विदेश में डॉ. जमजूम से सीखीं।

मिनिमल इनवेसिव तकनीक से छोटे से चीरे के जरियेे करते हैं सर्जरी
अपनी इलाज प्रणाली के बारे में बताते हुए डॉ. मुजाहिद ने कहा कि वे ऑपरेशन के लिए मिनिमल इनवेसिव सर्जरी तकनीक का उपयोग करते हैं। आमतौर पर सर्जरी करने के लिए एक बड़ा चीरा लगाया जाता है, जिसके जरिये ऑपरेशन होता है। लेकिन मिनिमल इनवेसिव तकनीक में एक बहुत की छोटा चीरा लगाया जाता है, जिससे पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक हो जाती है। इस सर्जरी की खास बात यह है कि इसमें न्यूनतम रक्तस्राव होता है और संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। इलाज के बाद फिजियोथेरेपी की जरूरत भी सिर्फ एक हफ्ते तक ही रहती है। इस तकनीक से इलाज कराने पर मरीज का अस्पताल में रहने का समय भी कम हो जाता है और ट्रेडिशनल सर्जरी की तुलना में रिकवरी भी बहुत जल्दी होती है। डॉ. सलीम के पास आने वाले मरीज इस तकनीक के जरिये अपना इलाज करा कुछ ही घंटों में चलने योग्य हो जाते हैं।

गरीबों का इलाज नि:शुल्क करते हैं डॉ. मुजाहिद
डॉ. मुजाहिद का कहना है कि बीमारी कभी किसी की आर्थिक स्थिति देखकर नहीं आती। इसलिए गरीब लोगों तक जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी का उपचार पहुंचे, यही मेरा मकसद है। ऑस्टओआर्थरिटिस कोई बीमारी नहीं, बल्कि उम्र के पड़ाव के साथ होने वाली एक स्थिति है, जिसमें घुटने और कूल्हों के जोड़ों पर दुष्प्रभाव पड़ता है और प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। देश में जो लोग जोड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करा पाने में सक्षम नहीं है, उनके लिए डॉ. मुजाहिद न परामर्श फीस लेते हैं और न ही सर्जरी की।