जयपुर। कहते हैं कि सेवा करने की चाह और समाज के प्रति समर्पण लीक से हटकर कुछ करने के लिए प्रेरित करता है। कुछ इसी तरह का सेवा मिशन लेकर सतत चल रहे हैं न्यूरो केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ. एन.सी. पूनिया। न्यूरो के मरीजों का दर्द उन्हें अपना लगा। उपचार से लेकर उनके परिजनों की समस्याओं को आत्मसात किया और फिर एक ऐसा प्रयास किया जो अब सभी के लिए मिसाल बन गया है। न्यूरो पेशेंट को एक छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलें, इसके लिए उन्होंने न्यूरो केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की और आज उनका सेंटर राजस्थान के सबसे बेहतरीन न्यूरो ट्रीटमेंट के सेंटर्स में से एक है।

एसएमएस में छात्र के रूप में प्रवेश, प्रोफेसर पद तक पहुंचे
डॉ. एन.सी. पूनिया बताते हैं कि वर्ष 1982 से लेकर 2013 तक सवाई मानसिंह अस्पताल में काम किया। छात्र के तौर पर प्रवेश लिया था और फिर प्रोफेसर के पद तक पहुंचा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद मैंने वहीं से एमएस जनरल सर्जरी एवं इसके बाद सुपर स्पेशलाइजेशन एमसीएच न्यूरोसर्जरी भी एसएमएस से ही की। इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर और फिर एसोसिएट प्रोफेसर बन गया। इसके बाद एचओडी न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर रहा। फिर जयपुर आकर प्रोफेसर रहते हुए मैंने वीआरएस ले लिया। जब वीआरएस लिया तो मेरा उद्देश्य था कि न्यूरो साइंस की सर्विसेज को बेहतर किया जाए। आम लोगों की समस्याओं और उनकी पीड़ा को दूर किया जाए। वर्तमान समय में तो कई सेंटर हैं जहां न्यूरो के मरीजों के लिए सुविधाएं उपलब्ध है, लेकिन उस समय ऐसा नहीं था। इसलिए मैं वन स्टॉप न्यूरो ट्रीटमेंट सेंटर बनाना चाहता था। उस समय कई बार होता था जब एक गरीब आदमी को बेड तक नहीं मिल पाता था, तब यह खयाल मन में आया कि मरीजों के लिए एक न्यूरो अफोर्डेबल क्लिनिकल सेंटर होना बहुत जरूरी है, जहां उसे पूरा उपचार मिल सके।

सपने को हकीकत में उतारा
डॉ. पूनिया बताते हैं कि इसी बारे में मैं सोच विचार करता था। तब मैंने न्यूरो केयर हॉस्पिटल एंड रिसर्च केयर की स्थापना की, जिसमें मेरे परिवार एवं मेरी धर्मपत्नी डॉ. बबीता चौधरी के पूर्ण सहयोग से यह संभव हो सका। हमने यही सोच रखी कि एक बार आने के बाद मरीज का सारा उपचार यहीं हो जाए। फिर चाहे उसे एमआरआई, सीटी स्कैन या खून की जांच, ऑपरेशन, आईसीयू या फिर अन्य कोई भी जरूरत हो, उसे सब सुविधाएं एक ही जगह मिल जाए। उपचार से संबंधित उसकी हर जरूरत एक जगह पर ही पूरी हो जाए। साथ ही यह भी आवश्यक था कि मरीज के साथ आने वाले परिजनों की परेशानी कम हो सके। हमने ऐसी व्यवस्था लागू की जिसमें मरीज हमारा मेहमान जैसा होता है। इलाज के अलावा भी उसकी सभी जरूरतों का ख्याल रखना हमारी जिम्मेदारी होती है। परिजनों के लिए भी यहां पर समस्त व्यवस्थाएं उपलब्ध है। इसी विजन के साथ हमने यह सेंटर शुरू किया है।

अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है सेंटर
डॉ. पूनिया ने बताया कि हमारे सेंटर पर नई तकनीकों द्वारा न्यूरोसर्जरी से पहले डायग्नोस करने के लिए सबसे लेटेस्ट सीटी स्केन, एमआरआई मशीन है एवं अन्य इंवेस्टीगेशन के लिए भी हाईटेक मशीनें हैं। आईसीयू में हमारे पास वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राकेश अग्रवाल, डॉ. हंसराज हैं जो स्थापना के साथ ही हमारे साथ मौजूद हैं। हमारे ऑपरेशन थियेटर में राजस्थान का फस्र्ट न्यूरो नेविगेशन सिस्टम है जो हमने 2013 में ही स्थापित कर लिया था। इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर को निकालने की नवीनतम तकनीक कुशा (केविट्रोन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिरेटर) भी हमारे पास है जिससे ट्यूमर को सर्जरी से काटने की जरूरत नहीं पड़ती है।

नॉर्थ इंडिया का पहला रोबोटिक रिहेबलिटेशन सेंटर किया स्थापित
डॉ. पूनिया ने बताया कि न्यूरो के पेशेंट्स को रिहेबलिटेशन की जरूरत होती है। जो हमारे पास है। इसके अतिरिक्त हमने रोबोटिक रिहेबलिटेशन सेंटर खोला है, जो हमारे दूसरे सेंटर हार्दिका अस्पताल में मिशन लाइफ के नाम से शुरू किया। इसे रोबोटिक इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वे स्पाइन और स्ट्रोक वाले मरीजों को बहुत ही संतुलित मूमेंट या एक्सरसाइज करवाते हैं। इसकी मदद से समाज में ये लोग फिर से स्थान बनाने की कोशिश कर सकते हैं।