जयपुर। डॉ. राजीव थापर जयपुर के प्रख्यात डेंटिस्टों में से एक हैं और पिछले 32 सालों में अपना क्लिनिक चला रहे हैं। उनके माता-पिता दोनों ही डेंटिस्ट थे और शुरू से ही उन्हें घर में पेशेंट्स के प्रति देखभाल और मानवता का माहौल देखने को मिला। पेशेंट्स के प्रति ऐसा जुड़ाव देखकर उन्होंने अपने पिता को रोल मॉडल बनाया और खुद भी आगे डेंटिस्ट बनने का निर्णय लिया। डॉ. राजीव थापर ने अपनी स्कूलिंग सेंट जेवियर स्कूल, डेंटिस्ट्री में ग्रेजुएशन चेन्नई और पोस्ट ग्रेजुएशन पीजीआई चंडीगढ़ से किया, गोल्ड मेडलिस्ट भी बने और अपनी मेडिकल शिक्षा प्राप्त की।

आधुनिक उपकरण और तकनीक से लैस क्लिनिक, विश्वस्तरीय उपचार

डॉ. राजीव थापर ने 1989 में डेंटिस्ट्री प्रैक्टिस शुरू की। डॉ. राजीव निरंतर डेंटिस्ट्री पर स्वयं रिसर्च करते रहे हैं और समय-समय पर दुनियाभर में डेंटल सर्जनों के लिए लेक्चर्स और वर्कशॉप्स आयोजित करते रहते हैं। उन्होंने भारत में एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और विदेश में अमेरिका, जर्मनी, मलेशिया व अन्य साउथ ईस्ट एशियाई देशों की नामी संस्थाओं में नई तकनीकों और इलाज प्रणालियों के बारे में लेक्चर्स दिए हैं। डॉ. राजीव थापर ने बताया कि उनका उद्देश्य पेशेंट्स को विश्वस्तरीय उपचार और सेवाएं प्रदान करवाना है। ऐसा करने के लिए उन्होंने अपने क्लिनिक में विश्वस्तरीय आधुनिक उपकरण और तकनीक जैसे डेंटल सीटी-स्कैन, डेंटल माइक्रोस्कोप, स्माइल डिजाइनिंग, लेजर गम सर्जरी, कैड-कैम मशीन इत्यादि स्थापित किए हैं, जिससे पेशेंट रूट कैनाल, सिंगल डे कैप, लेजर ब्लीचिंग, स्माइल मेकओवर, इनविजिबल ब्रेसिंग, क्राउन इम्प्लांट जैसे उपचार सिंगल विजिट में ही पा सकते हैं। डॉ. राजीव थापर अमेरिका से कॉन्शियस सेडेशन फॉर पेनलैस डेंटिस्ट्री में ट्रेनिंग ले उत्तर भारत में यह सुविधा देने वाले पहले डॉक्टर थे। डॉ. राजीव ने इंप्लांटोलॉजी में फैलोशिप भी की है।

हमेशा सीखते रहना और बेहतर बनते जाना ही मेरी ड्राइव

डॉ. राजीव ने बताया कि मेरा लक्ष्य पेशेंट्स को सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट देना है। मैं नई तकनीक, खोजों और इलाज प्रणालियों के बारे में स्टडी करता रहता हूं ताकि कोई भी जानकारी मुझसे न छूटे। एक चीज जिसे मैं और मेरा परिवार मानता है वो है मानवता, ह्यूमन टच। पेशेंट को ट्रीट करते वक्त हम इस तरह ट्रीटमेंट करते हैं जैसा हम खुद करवाना चाहेंगे। हर उम्र वर्ग के पेशेंट्स का उपचार थापर डेंटल क्लिनिक में किया जाता है और उन्हें उनकी उम्र के हिसाब से ही अटेंड करते हैं। मेरा यह मानना है कि ऐसा ट्रीटमेंट किया जाए कि मरीज को फिर से वही शिकायत लेकर न आना पड़े। मैं पेशेंट्स को केस की तरह नहीं बल्कि पर्सनल समझ कर ट्रीट करता हूं। उनकी बातें सुनना, समझना और कम्फर्ट देना हमारी कोर वैल्यूज में से एक है। शायद इसी वजह से आज हमारा हमारे पेशेंट्स के साथ गहरा रिश्ता बन गया है।

डेंटिस्ट्री से आगे, एक अच्छे समाज के लिए प्रयत्न

थापर परिवार में सभी डेंटिस्ट प्रोफेशन से जुड़े हैं। डॉ. राजीव थापर की पत्नी डॉ. रीना थापर भी एंडोडोंटिक्स (रूट कैनाल) में स्पेशलाइज्ड है। अपने माता-पिता से प्रेरित हो थापर परिवार की तीसरी पीढ़ी भी डेंटिस्ट्री को आगे बढ़ा रही है। बेटी डॉ. तन्वी थापर प्रोस्थोडोंटिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट है और बेटे डॉ. शमित थापर डेंटल सर्जरी में स्पेशलाइजेशन कर रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया से ट्रेनिंग लेकर आए हैं। लोक कल्याण भावना रखते हुए थापर परिवार ‘से चीज’ नामक एक सोशल कैंपेन चलाते हैं जिसमें वे विभिन्न स्कूल, एनजीओ और संस्थाओं में सोशली और इकोनॉमिकली वीक बच्चों और परिवारों को अच्छी ओरल आदतों के बारे में एजुकेट करते हैं। सिर्फ यही नहीं डॉ. तन्वी थापर कैंसर पेशेंट्स के लिए ‘लॉक्स ऑफ हैप्पीनेस’ नामक हेयर डोनेशन कैंपेन भी चलाती हैं जिसमें सम्पूर्ण भारत के लोग कैंसर के कारण बाल खो चुके बच्चों के लिए हेयर डोनेट करते हैं। डॉ. राजीव का कहना है कि यदि आप उस व्यक्ति से प्रेम नहीं कर सकते जिसे आप देखते हैं, तो आप उस ईश्वर से कैसे प्रेम कर सकते हैं जिसे आपने कभी देखा नहीं।