फिनटेक आंत्रप्रेन्योर तथा मोबिक्विक की को-फाउंडर उपासना टाकू कहती हैं कि बड़ी कामयाबी तक पहुंचना है तो छोटी सफलताओं को छोडऩे का रिस्क लें। वे बताती हैं कि 12 साल पहले जब मैंने यूएस की एक प्रतिष्ठित कंपनी की नौकरी छोड़कर अपने पति के साथ मोबिक्विक की शुरुआत की थी तो भारत में केवल 10 मिलियन यूजर्स ही ऐसे थे जो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते थे। आज इनकी संख्या 250 मिलियन है। इनमें से 108 मिलियन मोबिक्विक का इस्तेमाल करते हैं। यह मेरे लिए आसान नहीं था क्योंकि मेरे माता-पिता नहीं चाहते थे कि शानदार नौकरी छोड़कर मैं एक ऐसे स्टार्टअप में रिस्क लूं जो उस वक्त प्रचलन में नहीं था, लेकिन मुझे यह स्पष्टता थी कि सफलता रातोंरात नहीं मिलेगी। मैं यह भी जानती थी कि अगर मैंने हार नहीं मानी तो मैं कामयाबी के नजदीक जरूर पहुंच पाऊंगी। आगे चलकर यह सच भी हुआ। आज मोबिक्विक भारत की पहली ऐसी फिनटेक कंपनी है जिसे सेबी से आईपीओ की मंजूरी मिल गई है।

किसी भी स्टार्टअप को शुरू करने से पहले अपनी झिझक को दूर करें
इस राह में सबसे पहले मैंने अपने शर्मीले व्यवहार में बदलाव किया ताकि वित्तीय मदद के लिए लोगों से बात कर सकूं। यह भी एक बड़ी वजह बन सकती है जो आपको अपने लक्ष्य से दूर कर सकती है। आगे चलकर सही स्ट्रैटजी के साथ शुरू किया गया काम सही दिशा में चल निकला। धैर्य ने सबसे ज्यादा आगे बढऩे में मदद की।