इंटरनेट की पहुंच ने आज डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। लेकिन डिजिटल पेमेंट के शुरुआती समय में काफी मुश्किलें थीं। इन्हीं समस्याओं ने कई सफल स्टार्टअप को जन्म दिया। बिजनेस टू बिजनेस पेमेंट गेटवे रेजर पे भी उन्हीं में से एक है। 2014 में सिर्फ 300 कस्टमर से रेजर पे शुरू हुआ। आज लाखों बिजनेस अपने पेमेंट के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं। वित्तीय वर्ष 2021 में रेवेन्यू 800 करोड़ को पार कर गया है।
आईआईटी रुड़की से पढ़े हर्षिल माथुर और शशांक कुमार विदेश में नौकरी कर रहे थे। रेजर पे के सीईओ और को-फाउंडर हर्षिल बताते हैं कि 9 से 5 वाली नौकरी से हम जल्दी ही ऊब गए। कुछ नया करने के लिए हमने साइड प्रोजेक्ट शुरू किए। इस दौरान हमें डिजिटल पेमेंट लेने में काफी मुश्किलें आ रही थीं। तब हमें यह आइडिया आया कि अगर इस समस्या का समाधान कर दिया जाए तो ये सारे लोग हमारे ग्राहक हो सकते हैं। लिहाजा हमने इस पर काम करना शुरू किया।

इंजीनियर हो, इंजीनियरिंग करो कह कर 100 बैंकों ने खारिज किया
हर्षिल बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट गेटवे का आइडिया आने के बाद हम करीब 100 बैंकों के पास गए। सबने बोला कि आईआईटी से पढ़े हो, इंजीनियर हो, जाओ इंजीनियरिंग करो। कहां इस पेमेंट के चक्कर में फंस रहे हो। लास्ट में मुंबई के एक यंग बैंकर जो स्टार्टअप जैसी चीजों को समझते थे, वह हमारे प्रपोजल को समझे और मदद के लिए तैयार हो गए। अंत में अपने बिजनेस आइडिया पर भरोसा और हमारी दृढ़ता काम आई। इसलिए कभी शुरुआती असफलताओं से हार न मानें। लगातार कोशिश करते रहें।

स्टार्टअप तभी शुरू करें, जब किसी समस्या का समाधान कर सकते हैं
हर्षिल बताते हैं कि स्टार्टअप करना है, सोच कर सिर्फ स्टार्टअप ना करें। बल्कि किसी समस्या के समाधान के लिए स्टार्टअप शुरू करें। हमारे सफर में सबसे महत्वपूर्ण मोड था, 2015 में अमेरिका का वाई कॉम्बिनेटर प्रोग्राम। इसके अंतर्गत ओरिजनल स्टार्टअप आइडिया को फंड दिया जाता है। इसमें चुने जाने वाले हम दूसरे भारतीय थे। हमें 65 करोड़ रुपए का फंड मिला। पहले ही दिन हमारे साथ 300 कंपनियों ने साइन किया। यह सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि हम बिजनेस से जुड़ी बड़ी समस्या का समाधान कर रहे थे।

कंपनी की ग्रोथ सही, तो इनवेस्टर खुद आएंगे
नए स्टार्टअप फंड कैसे जुटाएं? सवाल पर हर्षिल कहते हैं कि नए लोग कंपनी के ग्रोथ पर ध्यान दें। अगर कंपनी की ग्रोथ सही है तो इनवेस्टर खुद आपके पास आएंगे। साथ ही स्टार्टअप को फंड और प्रमोट करने के लिए कई कार्यक्रम होते हैं। उनमें जाकर अपने आइडिया को रखिए। अगर आइडिया दमदार है तो इनवेस्टर जरूर मिल जाएंगे।